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बचपन के वो खेल जिन्हें हम कभी नही भूल सकते

बचपन इंसान के जीवन का सबसे अच्छा समय होता है, ऐसा आपने बहुत लोगों को कहते हुए सुना होगा और आप इस बात से शत-प्रतिशत सहमत भी होंगे। दरअसल जब हम छोटे थे तब हमारे सिर पर किसी भी तरह की जिम्मेदारी नहीं थी। दिल खोलकर मौज मस्ती करते थे। आज भी जब हम अपने बचपन की तस्वीरें देखते हैं तो पुराने दिनों को याद करते हैं। पुराने दिनों को याद करते हुए कई बार हमारी आंखों में आंसू भी आ जाते हैं।

बहुत पुरानी यादें हैं। बचपन में बहुत शरारती हुआ करते थे, चुस्की वाले की घंटी सुनते ही घर से दो मुट्ठी अनाज चुरा लेते थे और दोपहर में चुस्की का मजा लेते थे। गर्मी बढ़ते ही नहर में घंटों डुबकियां लगाते थे, सूती पजामे में हवा भर कर लाइफ जैकेट बना लेते थे। पेड़ पर आम आते ही नमक मिर्च का चूर्ण लेकर चुपके से आम के बाग में घुस जाते थे। यहां मुझे जगजीत सिंह का वह खूबसूरत गीत याद आ रहा है जो शायद आपने भी जरूर सुना होगा।

“ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो,
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी।
मग़र मुझको लौटा दो बचपन का सावन,
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी”

समय बदल चुका है, आज की पीढ़ी पुराने दौर में खेले जाने वाले खेलों के बारे में बहुत कम जानती है। हमारे बच्चे वीडियो गेम और टेलीविजन से चिपके रहते हैं। इन्हें देखकर हमें अफसोस होता है क्योंकि इनके जीवन में कोई मजा नहीं है। जब हम छोटे थे तो हमारे पास समय बिताने के लिए खेल और खिलौनों की कोई कमी नहीं थी।

आज के आर्टिकल में हम आपको ऐसे खेलों के बारे में बताने जा रहे हैं जो 90 के दशक और उससे पहले के दौर में बहुत पॉपुलर थे। यह सभी खेल अब कहीं गुम हो चुके हैं। शायद कहीं दूर दराज के गांव में आज भी बच्चे इन खेलों को खेलते हो परंतु शहर के बच्चों को इनके बारे में ना ही ज्ञान है और ना ही रुचि।

1. घोडा बादाम खाई पीछे देखे मार खाई
वैसे तो इस खेल के कई अलग-अलग नाम है। अलग अलग भाषा और अलग-अलग राज्यों में इसे अलग अलग स्लोगन से जाना जाता है। शायद आपके राज्य में इसे अलग नाम से जाना जाता होगा, यह खेल स्कूलों में बहुत पॉपुलर था। म्यूजिकल चेयर का ही एक रूप यह खेल अब कहीं गुम हो चुका है। इस खेल को खेलने के लिए बड़े प्लेग्राउंड की जरूरत होती थी। आज के दौर के स्कूल छोटे होते जा रहे हैं जो अब 15 से 20 क्लासरूम तक ही सिमट कर रह गए हैं। हमारे जमाने में स्कूल इतने बड़े होते थे कि वहां एक हवाई जहाज को भी लैंड कराया जा सकता था।

Indian popular childhood games

2. लट्टू
लट्टू गांव और देहाती इलाकों में आज भी बहुत पॉपुलर है। इस खेल को ठीक से खेलने के लिए बहुत अभ्यास की जरूरत पड़ती है। भारतीय खेलों की खास बात यह है कि इनके लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं। जब हम छोटे थे तो लट्टू 2 या 3 रुपये में मिल जाता था। यदि आप लट्टू को अपनी हथेली पर नचा लेते थे तो आपको इस खेल में ब्लैक बेल्ट माना जाता था।

Indian popular childhood games- लट्टू

3. कंचे
लड्डू के बाद कंचे दूसरा सबसे पॉपुलर खेल था। शायद ही कोई बच्चा हो जिसने ये खेल ना खेला हो। इसके लिए आपको कांच से बनी हुई छोटी-छोटी गोलियों की जरूरत पड़ती थी जिन्हें कंचे कहा जाता था। वैसे कंचे पूरे एशिया में खेले जाते हैं लेकिन भारत के बच्चे इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैंम जिसके पास कंचो का सबसे बड़ा कलेक्शन होता था उसे गली का लीडर माना जाता था।

Indian popular childhood games - कंचे

4. स्टापू
स्टापू लड़कियों का खेल था, लेकिन हम लड़के भी इस खेल में शामिल हो जाते थे। इसकी वजह शायद यह थी कि हमारी गली में लड़कियों की संख्या ज्यादा थी और लड़कों की संख्या बहुत कम। इसलिए मजबूरी में हमें लड़कियों वाले खेल खेलने पड़ते थे। बहुत अजीब बात थी कि लड़के लड़कियों वाले खेल खेलने को राजी हो जाते थे लेकिन लड़कियां लड़कों वाले खेल नहीं खेलती थी। यह खेल बहुत लंबा चलता था। शायद ही आप कभी इस खेल के अंत तक पहुंचे होम इस खेल का अंत होने से पहले ही मम्मी की आवाज हमें घर वापस आने का न्योता भेज देती थी।

Indian popular childhood games- स्टापू

5. कच्ची घोड़ी पक्की घोड़ी
इस खेल को भी कई अलग अलग नामो से पुकारा जाता था। यह खेल गर्मियों की छुट्टियों में बहुत खेला जाता था। इस खेल की खास बात यह थी कि इसे लड़के और लड़कियां साथ मिलकर खेल सकते थे। किसी एक को घोड़े जैसी मुद्रा में खड़े होना पड़ता था और बाकी सब उसके ऊपर से छलांग लगाते थे। इस खेल के नियम मुझे ठीक से याद नही परंतु इतना जरूर याद है कि इसे खेलते समय बहुत मजा आता था।

Indian popular childhood games

6. इमली
यह खेल आमतौर पर लड़कियां खेलती थी परंतु कभी-कभी हम लड़के भी लड़कियों के साथ इस खेल में शामिल हो जाते। मनोरंजन से भरपूर यह खेल भागदौड़ भरा होता था। इस खेल को खेलते वक्त आपकी सेहत भी बनी रहती थी। यह खेल समय के साथ पूरी तरह से विलुप्त हो गया है आज के बच्चे इस खेल के बारे में शायद ही जानते हो।

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7. टायर घुमाना
स्कूल से घर पहुंचते ही हम अपना बैग बिस्तर पर फेंकते थे और बिना यूनिफार्म बदले टायर उठाकर घर से निकल जाते थे। एक गांव से दूसरे गांव टायर घुमाते फिरते थे। इस खेल के लिए आपको एक पुराने टायर की जरूरत होती थी जो आसानी से कहीं भी मिल जाता था। हमारे दौर में भी इस खेल को थोड़ा लो स्टैंडर्ड समझा जाता था। लेकिन टायर घुमाने में अलग ही मजा आता था।

Tayar ghumana

8. गिल्ली डंडा
गिल्ली डंडा एक बहुत पुराना खेल है और आज भी बहुत पॉपुलर है। इस खेल को खेलने के लिए आपको खुले मैदान की जरूरत होती थी जो शहरों में बहुत ही कम मिलता है। गांव देहात के इलाकों में खेतों के बीच में इस खेल को खेलने का मजा ही अलग था। कई बार हमने यह खेल अपनी गली में खेलने की कोशिश की लेकिन आस पड़ोस के लोग हम पर चिल्लाते थे।

Indian popular childhood games - गिल्ली डंडा

9. पटाखे
दिवाली करीब आते ही पटाखे जलाने की धुन सिर पर सवार हो जाते थी। पटाखों की छोटी-छोटी दुकानें हर जगह खुलने लगती थी। उस समय हमारे पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे इसलिए हम पिस्तौल में डालकर चलाने वाली पटाखे की लड़ी को ही अफ़ोर्ट कर पाते थे। वैसे पिस्तौल में चलाने वाले पटाखे दो तरह के होते थे, एक बिंदी के रूप में होते थे और दूसरा लड़ी के रूप में। कई बार पिस्तौल खराब हो जाती थी तो हम पत्थर मारकर ही पटाखे फोड़ लेते थे।

Indian popular childhood games- पटाखे

10. पिट्ठू
पिट्ठू आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना 25 साल पहले था। दरअसल इस खेल को खेलने के लिए आपको सिर्फ एक बॉल की जरूरत होती थी और 7 चपटे पत्थरों की। इस खेल को खेलने के लिए सभी खिलाड़ियों को दो टीमों में बांटा जाता था। एक टीम बिखरे हुए इन पत्थरों को एक के ऊपर एक सजाने की कोशिश करती थी जबकि दूसरी टीम का काम इन्हें रोकना होता था। यदि इन चपटी पत्थरों को एक दूसरे के ऊपर सजाते समय बॉल खिलाड़ी को छू जाती थी तो वह आउट हो जाता था।

Indian popular childhood games - पिठ्ठू

दोस्तों कमेंट करके हमें जरूर बताएं कि आपने इनमें से कौन-कौन से खेल खेले हैं? आप अपने बचपन की यादों से जुड़े हुए कुछ अच्छे अनुभव भी हमें शेयर कर सकते हैं।

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