2

क्या तुलसीदास ने NASA से 500 साल पहले ही पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का अंदाजा लगा लिया था?

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।

तुलसीदास हनुमान जी की तारीफ करते हुए कह रहे हैं कि जुग सहस्त्र जोजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने मीठा फल समझकर खा लिया।

हनुमान चालीसा के इस श्लोक को आधार बनाकर कुछ लोग कहते हैं कि तुलसीदास ने 500 वर्ष पहले ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का अंदाजा लगा लिया था जबकि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूर्य और पृथ्वी की दूरी का अंदाजा बहुत बाद में लगाया है।

विश्वास करने वाले लोगों का तर्क:

इस श्लोक में 3 शब्दों का अर्थ समझना जरूरी है। (1) जुग (2) सहस्त्र (3) जोजन।

(1) जुग या जिसे माहयुग भी कहा जाता है इनका अनुमान इस तरह आए लगाया जाता है

सत्युग 4800 साल का

त्रेतायुग 3600 साल का

द्वापर युग 2400 साल का

कली युग 1200 साल का

अर्थात महायुग या जिसे हम जुग के नाम से भी संबोधित करते हैं इसमें कुल 12000 वर्ष होते हैं।

(2) सहस्त्र
सहस्त्र में 1000 वर्ष होते है।

(3) जोजन या योजन
योजन का अनुमान लगाने से पहले हमें कोस के बारे में जान लेना चाहिये। कोस और जोजन ये सभी दूरी नापने की इकाई है लेकिन इनका उपयोग सिर्फ भारत में ही होता है। वह भी अब बहुत कम हो गया है। एक कोस लगभग 3.2 किलोमीटर होता है हालांकि अलग-अलग विद्वानों ने इसकी लंबाई अलग अलग बताई है लेकिन हम औसत लेकर चलते हैं जो 3.2 किलोमीटर है।

4 कोस एक योजन के बराबर होता है और इसमें कोई भी विवाद नहीं है। इस प्रकार एक योजन 12.8 किलोमीटर के बराबर हो गया।

अब आते हैं श्लोक में दिए गए आंकड़े पर
जुग x सहस्त्र x जोजन = सूर्य और पृथ्वी के बीच को दूरी

12000 x 1000 x 12.8 = 153600000 KM

यह दूरी नासा द्वारा बताई गई दूरी (149600000KM) के बहुत करीब है।

तो क्या तुलसीदास ने 500 वर्ष पहले की पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी का अंदाजा लगा लिया था?

इस प्रश्न का जवाब आपको तब तक नहीं मिलेगा जब तक आप इस तर्क की आलोचना करने वाले लोगों का जवाब ना सुन ले। चलिए जानते हैं कि इस तर्क की आलोचना करने वाले लोग क्या कहते हैं।

जुग और सहस्त्र समय की इकाई है और जोजन दूरी नापने की इकाई है। इन सब को एक साथ गुणा करना गणित के नियमों के विरुद्ध है। जिस प्रकार हम 20 किलोग्राम संतरों को 10 दर्जन केले के साथ गुणा नहीं कर सकते।

आलोचना करने वाले लोगों की बात में दम नजर आता है। यदि आप किसी तर्क पर विश्वास करते हैं तो उसे साबित करने के लिए इस तरह की तुक्केबाजी करने लगते हैं। आप इसे अंधविश्वास भी कह सकते हैं क्योंकि इतना गणित तो आपने भी जरूर पढ़ा होगा। इसके बावजूद आप बिना कोई सवाल किए इस तर्क पर विश्वास करने लगते हैं।

admin

2 Comments

  1. क्षमा करें किन्तु गणना क्यों नहीं हो सकती ? मान लीजिए हमारे तौलने के लिए उस समय 20 किलो संतरा और 10 दर्जन केले ही हैं और दोनों का वजन समान( या अंतर भी है , माना 10 किलो है) तो सुविधा के लिए हम दोनों की तौल शामिल कर अपना काम तो कर ही सकते हैं । तुलसीदास ने कोई गणित का ग्रंथ तो लिखा नहीं था । तुलसीदास ने स्तुति की है ,(साहित्य लिखा है) जिसमें भाव प्रधान होता है ।

    • यहीं तो आप गलती कर रहे हैं। 20 किलो संतरे को तोला जा सकता है लेकिन 10 दर्जन केलो को तोला नहीं जा सकता। क्योंकि दर्जन गिनती की इकाई है वजन कि नहीं। यदि आप गणना करने के लिए गणित के नियमों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो उन्हें ठीक से करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *